20 February 2011

मंहगाई पर सरकारी बयान - है कोई जिम्मेदारी लेने वाला ?

मंहगाई पर सरकारी बयान

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

जुलाई 2009: भारत की महंगाई दर दिसंबर 2009 तक नीचे 6 प्रतिशत तक आ जाएगी, क्योंकि सामान्य मानसून से खाद्य कीमतें कम हो जाएगी।

फरवरी 2010: मैं समझता हूं कि खाद्य-महंगाई में बुरे दिन अब बीत चले है। हाले के सप्राहों में खाद्य कीमतें नरम पड गई है और उम्मीद करता हूं कि यह प्रक्रिया जारी रहेगी। (महंगाई पर विचार करने के लिए बुलाई गई मुख्यमंत्रियों की बैठक में)

जुलाई 2010: महंगाई की वर्तमान ऊंची दर मुख्य रूप से खाद्य कीमतों में वृद्धि के कारण है। सरकार ने महंगाई को काबू करने के लिए कई कदम उठाए है। हम उम्मीद करते हैं कि दिसंबर तक थोक कीमतों में महंगाई की दर 6 प्रतिशत तक नीचे आ जाएगी।

20 जनवरी 2011: मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं। लेकिन मुझे भरोसा है कि कीमतों की स्थिति काबू में आ जाएगी। ………मार्च तक हम कीमतों में स्थिरता ला पाएंगे।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी

सितंबर 2009: हमें खाद्यान्नों की उपलब्धता के बारे में ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नही है।

मई 2010: महंगाई के बारे में हम जागरूक है, किंतु मैं इस विषय में भगदड या डर नहीं पैदा करना चाहता (आई एम नाॅट प्रेसिंग द पेनिक बटन)।

अगस्त 2010: यदि ब्याज दरों को बहुत बढा दिया तो कोई पूंजी निवेश नहीं होगा कोई विकास नही होगा। ………. यदि मैं मेरे आर्थिक विकास में समझौता कर लूं, तब तो मैं निश्चित ही महंगाई पर काबू पा सकूंगा।

13 जनवरी 2011: महंगाई को लेकर घबराने की जरूरत नही है। सरकार के लिए खासी परेशानी पैदा कर रही खाद्य पदार्थो की महंगाई दर नीचे आ गई है।

योजना आयोग उपाध्यक्ष, मोंटेक सिंह अहलूवालिया

अप्रैल 2010: भारत की महंगाई दर दो या तीन महीनों में गिर सकती है।

जुलाई 2010: वर्ष के अंत तक भारत की महंगाई दर ‘आरामदेह स्तर’ पर लौट सकती है।

अगस्त 2010: महंगाई की दर में कमी हो रही है और दिसंबर तक यह आरामदेह हो जाएगी। ……… हम जो कह रहे थे वैसा ही हो रहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक डिप्टी गवर्नर, सुबीर गोकर्ण

जून 2010: जो खाद्य महंगाई दर पिछले नवंबर से 15 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है, वह इस साल की सामान्य वर्षा से कम हो जाएगी।

अगस्त 2010: हमारा ख्याल है कि हमने महंगाई का प्रबंध करने के लिए काफी कुछ किया है और हम इस वर्ष के दूसरे हिस्से में इसका असर देखेंगे, क्योंकि किसी भी कार्रवाई का असर होने में कुछ समय लगता है।

इस मुद्दे पर कोई जिम्मेदारी लेने वाला, इस सरकार में तो कोई देखता नहीं।

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